
आइजोल में शुक्रवार को मिजोरम का प्रसिद्ध वसंत त्योहार चापचर कुट 2026 बड़े धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए लोगों से सद्भाव और एकजुटता का आह्वान किया, जो इस उत्सव की आत्मा को प्रतिबिंबित करता है।
मिजो समुदाय का यह सबसे प्रिय पर्व झूम खेती के चरण पूरा होने पर आता है, जो सर्दी के अंत और बसंत के स्वागत का प्रतीक है। यह प्रकृति के नवीनीकरण और मानव जीवन की ताजगी का संदेश देता है। हर आयु वर्ग के लोग इसमें शरीक होते हैं।
चमकीले पारंपरिक वेशभूषा में सजे नृत्यकारों ने रात भर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कला एवं संस्कृति मंत्री सी. लालसावियुंगा ने मेजबानी की, जबकि पूर्व राज्यपाल वी.के. सिंह भी मौजूद रहे। इसकी थीम ‘जो नुन जे मावी – इनरेमना’ अर्थात् संस्कृति की सुंदरता और सद्भाव पर केंद्रित रही।
9 मार्च से शुरू सप्ताहिक आयोजन में हथकरघा, हस्तशिल्प प्रदर्शनियां, खाद्य प्रसंस्करण, फूल प्रदर्शनी, मिजो जीवनशैली का जीवंत संग्रहालय, चित्रकला एवं फोटो प्रदर्शनियां तथा फिल्म स्क्रीनिंग शामिल रहीं।
मुख्य समारोह शुक्रवार को हुआ, जिसमें भारत-विदेश से पर्यटक और पूर्वोत्तर के मिजो भाइयों ने हिस्सा लिया। लालदुहोमा ने विश्व भर के मिजो लोगों को बधाई दी और पूर्वजों की परंपरा का स्मरण कराया, जहां यह पर्व झगड़ों से मुक्त रहता था।
उन्होंने पारंपरिक न्याय सिद्धांतों ‘चालरेम’ व ‘साउई तान’ का उल्लेख कर कहा कि सच्ची एकता के लिए गलतियों को मानना जरूरी है। यह त्योहार मिजोरम की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करता है।