
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेता मीरवाइज उमर फारूक ने बुधवार को ईरान में हुई घटनाओं पर पूरे क्षेत्र में मुसलमानों द्वारा दिखाई गई एकजुटता की सराहना की। कश्मीर घाटी से लेकर जम्मू तक चले बंद ने उत्पीड़न के खिलाफ समाज की मजबूत नैतिकता को उजागर किया है।
यह शोक और निंदा का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जो एक उम्माह के रूप में हमारी संवेदनशीलता दर्शाता है। मीरवाइज ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और भावुक अभिव्यक्ति के अधिकार का पूरा सम्मान होना चाहिए।
महिलाओं और बच्चों समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। सोशल मीडिया पर एफआईआर और स्थानीय मीडिया के खातों पर रोक लगाना भी कानून के विरुद्ध है।
उन्होंने अधिकारियों से सभी हिरासतियों को रिहा करने और अभिव्यक्ति पर सेंसरशिप की नीति पर पुनर्विचार की मांग की।
इससे पहले, पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने अमेरिका-इजराइल के ईरान हमलों पर केंद्र और एनसी की चुप्पी पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर बोलना अपराध नहीं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुफ्ती ने भारत के ईरान समर्थन के पुराने दिनों का जिक्र किया, जब प्रतिबंधों में ईरान ने मुफ्त तेल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता की खामोशी का मतलब जनता की आवाज दबाना नहीं।