
भाजपा नेता अरुण सिंह ने यूपीए सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई थी। उत्तर प्रदेश के एक सभा में बोलते हुए सिंह ने योजना की विफलताओं को बयां किया, जो गरीबों के लिए बनाई गई थी लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों के हाथों लूट का जरिया बनी।
सिंह ने सीएजी रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि काल्पनिक मजदूर, नकली जॉब कार्ड और फर्जी बिलों से हजारों करोड़ की हेराफेरी हुई। ‘गरीबों का पैसा अमीरों के खातों में चला गया,’ उन्होंने कहा। उन्होंने मोदी सरकार की डिजिटल निगरानी, आधार लिंकिंग और डीबीटी जैसी सुधारों की सराहना की, जिनसे पारदर्शिता आई है।
विपक्ष ने इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया, लेकिन आंकड़े सुधारों की पुष्टि करते हैं। यह बयान चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण है, जहां कल्याण योजनाएं मुद्दा बनी हैं। सिंह का यह ऐलान भाजपा के लिए ग्रामीण वोटरों को लामबंद करने का हथियार साबित हो सकता है।
मनरेगा की यह बहस शासन की जवाबदेही पर केंद्रित है, जो लोकतंत्र की मजबूती दर्शाती है।
