
मेघालय सरकार ने शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों के लिए कम्युनिटी-इंटीग्रेटेड स्किल लर्निंग कार्यक्रम को औपचारिक मंजूरी दे दी है। यह पहल स्थानीय समुदायों के ज्ञान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर छात्रों को व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है।
कार्यक्रम के तहत छात्र बांस कला, जैविक खेती, डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में स्थानीय कारीगरों व विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेंगे। शिक्षा मंत्री लाहकमेन रymbui ने शिलांग में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।’
शुरुआत में 50 सरकारी स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा, जो 2025 तक पूरे राज्य में विस्तारित हो जाएगा। इसमें शिक्षक प्रशिक्षण, कौशल प्रमाणन और केंद्र सरकार की योजनाओं से वित्त पोषण शामिल है। ग्रामीण एवं आदिवासी छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी होगा, जहां ड्रॉपआउट दर अधिक है।
एनजीओ और अभिभावक संगठनों ने स्वागत किया है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में बुनियादी ढांचे की चुनौतियां हैं, लेकिन समुदाय-आधारित दृष्टिकोण से सफलता की उम्मीद है। मेघालय इस तरह पूर्वोत्तर में कौशल शिक्षा का मॉडल बन सकता है।