
हिंदू पंचांग में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है। माघ मास की अमावस्या तिथि पर पड़ने वाला यह दिन ईश्वर की आराधना, पितरों का तर्पण और दान-पुण्य के लिए समर्पित होता है। मौन व्रत धारण कर भक्त गहन चिंतन में लीन हो जाते हैं, जिससे आत्मा की शुद्धि होती है।
प्रातःकाल गंगा स्नान या तीर्थ स्नान से दिन की शुरुआत होती है। तिल, कुशा और जल से पितृ तर्पण किया जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन पितृदोष से पीड़ित जातकों को विशेष लाभ मिलता है। दोष निवारण के लिए गायत्री मंत्र जाप और हवन अनिवार्य हैं।
दान का महत्व सर्वोपरि है। ब्राह्मणों को काला तिल, जौ, अनाज और वस्त्र दान करने से पुण्यफल प्राप्त होता है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और दीप प्रज्वलन से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
आज के भागदौड़ भरे जीवन में मौनी अमावस्या मौन की शक्ति सिखाती है। यह परिवारिक कलह समाप्ति और समृद्धि का प्रतीक है। संध्या के बाद मौन तोड़ते हुए कृतज्ञता व्यक्त करें, ताकि पितृ आशीर्वाद बना रहे।