
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शोर-शराबे से परेशान हो चुके लोगों के लिए मौन व्रत एक वरदान साबित हो रहा है। यह प्राचीन भारतीय परंपरा न केवल शरीर को स्वस्थ बनाती है, बल्कि दिमागी परेशानियों को भी जड़ से दूर रखती है।
मौन व्रत रखने से तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि चुप्पी के दौरान कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर घटता है, जो तनाव का मुख्य कारण है। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से भी बचाव होता है।
शरीर के लिए भी फायदेमंद है यह व्रत। बोलने से बचने पर पाचन तंत्र को आराम मिलता है, इम्यूनिटी मजबूत होती है। नींद की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है और थकान दूर रहती है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्रत वोकल कॉर्ड्स को मजबूत करता है।
महात्मा गांधी सोमवार को मौन व्रत रखते थे। आजकल सेलिब्रिटी और बिजनेसमैन भी इसे अपनाने लगे हैं। शुरुआत छोटे-छोटे सत्रों से करें, धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। ध्यान और योग के साथ जोड़ें तो परिणाम चमत्कारी मिलेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य संकट के इस दौर में मौन व्रत सरल और प्रभावी उपाय है। इसे अपनाकर आप स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं। मौन ही समाधान है।