नवरात्र द्वितीय दिन: महाकालेश्वर में भस्म आरती का दिव्य दृश्य, भक्तों का अपार जनसैलाब
उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह की भस्म आरती के दर्शन के लिए रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। यह पावन आरती बाबा महाकाल...

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह की भस्म आरती के दर्शन के लिए रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। यह पावन आरती बाबा महाकाल के निराकार से साकार रूप के दर्शन कराती है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक आनंद का सर्वोच्च क्षण साबित होता है।
ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खोले गए। सबसे पहले पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस समाहित था। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के पंडों ने मंत्रोच्चार के बीच भस्म अर्पण की। कपिला गाय के गोबर से बने कंडे और शमी, पीपल, पलाश आदि की लकड़ियों से तैयार पवित्र भस्म शिवलिंग पर चढ़ाई गई।
आरती के बाद बाबा का भव्य शृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुंड, चंद्रमा, नवीन मुकुट, बेलपत्र और रंग-बिरंगे फूलों की मालाएं सजाकर बाबा को अत्यंत सुंदर रूप प्रदान किया गया। मंदिर परिसर 'बम बम भोले' और 'हर हर महादेव' के नारों से गुंजायमान हो उठा।
यह दो घंटे की आरती भक्तों को गहन भक्ति का अनुभव कराती है। गर्भगृह में पुरुषों का ही प्रवेश है, जबकि महिलाएं नंदी हॉल या बैरिकेडिंग से दर्शन करती हैं। दिन भर छह अन्य आरतियां—बालभोग, भोग, पूजन, संध्या और शयन—होती हैं। नवरात्र के इस दिन महाकालेश्वर ने अपनी ज्योतिर्लिंग की महिमा फिर एक बार प्रमाणित की।


