
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र कृष्ण द्वितीया के अवसर पर गुरुवार को भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महाकाल के दर्शन और भस्म आरती के लिए दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने रात से ही मंदिर पहुंचना शुरू कर दिया था।
मंदिर परिसर ‘हर हर महादेव’ और ‘जय महाकाल’ के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा। भक्तों के चेहरे पर भक्ति की भावुकता साफ झलक रही थी। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा संपन्न भस्म आरती में बाबा महाकाल ने निराकार से साकार रूप धारण किया।
आरती के बाद जलाभिषेक, पंचामृत से स्नान, जिसमें शुद्ध दूध, दही, घी, शक्कर, शहद व फलों का रस मिलाया गया, तथा पवित्र भस्म से विशेष अभिषेक किया गया। इसके उपरांत चंदन का श्रृंगार, मस्तक पर चंद्रमा, नवीन मुकुट और फूलमाला से बाबा को अलंकृत किया गया।
यह दैनिक परिवर्तनशील श्रृंगार भक्तों को मंत्रमुग्ध कर गया। देश-विदेश में विख्यात इस भस्म आरती में भाग लेने हेतु ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है, जिसमें शुल्क भी जमा करना पड़ता है।
महाकालेश्वर, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, आस्था का ऐसा केंद्र है जहां हर क्षण दिव्यता का अनुभव होता है। इस आयोजन ने एक बार पुनः उज्जैन की धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया।