
नई दिल्ली, 5 मार्च। हिंदू पंचांग के अनुसार हर दिन नई तिथियां और मुहूर्त लेकर आते हैं, जो सनातन धर्म में किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए मार्गदर्शक होते हैं। 6 मार्च, शुक्रवार को भद्रा और राहुकाल का प्रभाव रहेगा, लेकिन विशेष शुभ मुहूर्त भी मौजूद हैं।
तृतीया तिथि शाम 5:53 बजे तक रहेगी, उसके बाद चतुर्थी प्रारंभ हो जाएगी। यह भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का दिन है, जिसमें भगवान गणेश का पूजन और व्रत किया जाता है। महिलाएं संतान और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
शुभ मुहूर्तों में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:57 बजे तक, विजय मुहूर्त 2:30 से 3:17 बजे, गोधूलि 6:22 से 6:47 बजे, ब्रह्म मुहूर्त 5:03 से 5:53 बजे और अमृत काल सुबह 4:23 से 6:06 बजे (7 मार्च तक) शामिल हैं।
अशुभ काल से बचें: राहुकाल 11:05 से 12:33 बजे, गुलिक काल 8:10 से 9:38 बजे, यमगंड 3:29 से 4:47 बजे, दुर्मुहूर्त 9:02 से 9:49 बजे। भद्रा सुबह 6:42 से शाम 5:53 बजे तक और आटल योग 6:42 से 9:29 बजे तक रहेगा।
संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त शाम 7:53 बजे से 7 मार्च शाम 7:17 बजे तक। सूर्योदय 6:42 बजे, सूर्यास्त 6:25 बजे, चंद्रोदय 9:14 बजे। दिशाशूल पश्चिम दिशा में।
इन मुहूर्तों का पालन कर 6 मार्च को सफलता और आशीर्वाद प्राप्त करें।