
नई दिल्ली। राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी किताब में न्यायपालिका भ्रष्टाचार और 1947 विभाजन पर बदलावों पर कहा कि इतिहास उसके समय के परिप्रेक्ष्य में ही समझा जाना चाहिए।
आईएएनएस से बातचीत में झा ने बताया कि गांधीजी और तत्कालीन नेता विभाजन के खिलाफ थे, लेकिन हिंसक माहौल और खूनखराबे ने फैसले थोपे। आज पीछे मुड़कर बोलना सरल है, पर उस दौर की कठिनाइयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व कांग्रेस ने किया था।
एनसीईआरटी की नई किताब में लिखा है कि गांधी और कांग्रेस ने विभाजन का विरोध किया, मगर इसे अपरिहार्य मान स्वीकारा।
झा ने एआई इम्पैक्ट समिट प्रदर्शन में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। वे मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं, जबकि लाल किला, पहलगाम, पुलवामा जैसे मामलों में ऐसा नहीं हुआ। छोटे प्रदर्शन पर यह जल्दबाजी संदेहास्पद है। सरकार को सोचना चाहिए।
बिहार में स्कूल-मंदिरों के पास नॉनवेज बिक्री प्रतिबंध पर झा ने डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की गिरिराज सिंह जैसी राजनीति की आलोचना की। भारत विविधताओं का देश है। उनके गांव में मंदिर के पास स्कूल है और पशुबलि परंपरा। एकांगी नीति काम नहीं करेगी। सुर्खियां बटोरने के चक्कर में वैचारिक राजनीति जरूरी।
