
पटना के बिहार संग्रहालय में मंगलवार को पद्मश्री अभिनेता मनोज बाजपेयी का दौरा रहा चर्चा का विषय। उन्होंने यहां राज्य की फिल्म प्रोत्साहन नीति की जमकर तारीफ की। बिहार अब केवल साहित्य और लोक कलाओं तक महदूद नहीं रहना चाहता, बल्कि फिल्म निर्माण व रंगमंच के क्षेत्र में देशव्यापी पहचान कायम करने को बेताब है।
नीति निर्माण से जुड़े बाजपेयी ने बताया कि यह नीति देशभर के फिल्मकारों को बिहार की ओर खींच रही है। यह कदम राज्य के सांस्कृतिक उत्थान और आर्थिक मजबूती के लिए वरदान साबित होगा। बेहतर शूटिंग स्पॉट, तकनीकी सुविधाएं और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होने से स्थानीय नौजवानों को अभिनय व निर्माण के सुनहरे मौके मिलेंगे।
बिहार की सामाजिक यथार्थवादी कहानियां और ऐतिहासिक विरासत सिनेमा के लिए अमूल्य खजाना हैं, जिन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमकाया जा सकता है। संग्रहालय भ्रमण में उन्होंने पाषाण युग से मुगल काल तक की यात्रा को मूर्तियों, बर्तनों, खिलौनों व औजारों के जरिए सराहा।
यह संग्रहालय भारतीय सभ्यता के रंग-बिरंगे रूप जीवंत करता है, बोले बाजपेयी। कला एवं संस्कृति सचिव प्रणव कुमार से नीति पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने बिहार के नए सिनेमाई युग का स्वागत किया, जिसमें कलाकारों व निर्माताओं को अपार लाभ होगा।
संग्रहालय की आधुनिकता व परंपरा संरक्षण की सराहना करते हुए बाजपेयी ने विभाग को धन्यवाद दिया। यह न केवल बिहार, अपितु समग्र भारत का गौरव है।