
मणिपुर के पहाड़ी जिले कांगपोखी में नशीली दवाओं के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाई हुई है। मात्र छह दिनों में 306 एकड़ से अधिक अफीम की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। यह सफलता राज्य की नारकोटिक्स के विरुद्ध लड़ाई में मील का पत्थर साबित हो रही है।
पिछले सप्ताह शुरू हुई इस मुहिम में पुलिस, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में सक्रिय हुईं। अफीम का पौधा, जो अफीम और हेरोइन का कच्चा माल है, इन दुर्गम क्षेत्रों में आसानी से उगाया जाता रहा है। छह दिनों तक चले अभियान में गांव-गांव में फैली अवैध खेती को जड़ से उखाड़ फेंका गया।
चश्मदीदों के अनुसार, बुलडोजर और मजदूर दिन-रात लगे रहे, जिससे कोई निशान भी बाकी न रहा। अधिकारियों का अनुमान है कि नष्ट की गई फसल से हजारों किलोग्राम अफीम प्राप्त हो सकती थी, जो पूर्वोत्तर भारत और विदेशों में नशीले पदार्थों के बाजार को मजबूत कर रही थी।
यह कार्रवाई मणिपुर सरकार की दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। स्थानीय नेता इसे युवाओं को नशे से बचाने का कदम बता रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना वैकल्पिक रोजगार के यह खेती फिर लौट सकती है। कांगपोखी के निवासी अब नशामुक्त भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ऐसे और अभियान चलाने का वादा किया गया है।