
जिरीबाम में बुधवार को मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हिंसा से प्रभावित आंतरिक विस्थापित लोगों से मुलाकात की। पिछले दो वर्षों की कड़वी यादों को भूलकर शांति और विकास की राह पर साथ चलने की भावुक अपील की।
असम सीमांत जिले के पहले दौरे पर पहुंचे सीएम ने राहत शिविरों में कहा, ‘इन दो सालों को बुरे सपने की तरह देखें और आगे बढ़ने का हौसला जुटाएं।’ जिरीबाम हायर सेकेंडरी स्कूल कैंप में मैतेई विस्थापितों से बातचीत में उन्होंने विश्वास की कमी दूर करने पर बल दिया।
‘जिरीबाम मणिपुर का प्रवेश द्वार है, जो व्यापारिक केंद्र बन सकता है। शांति के बिना प्रगति असंभव,’ उन्होंने जोर देकर कहा। कालीनगर कैंप में हमार जनजाति के लोगों को ईसाई धर्म के क्षमा के संदेश से प्रेरित किया। जारोलपोकपी गांव का दौरा कर स्कूल निर्माण की मांग सुनी।
मोंगबुंग मैतेई गांव में सड़क मरम्मत की पुकार पर विकास का भरोसा दिलाया। ‘मणिपुरी पहचान को मिटाने की साजिश रुकनी चाहिए। हम सबसे पहले भारतीय, फिर मणिपुरी हैं,’ उनका संदेश स्पष्ट।
विस्थापितों के घर मार्च तक तैयार होने की जानकारी दी। बुजुर्ग महिला को व्हीलचेयर भेंट की। मीडिया को बताया कि आईडीपी पुनर्वास प्रक्रिया तेज होगी। जिले के महत्व को रेखांकित करते हुए एकजुट मणिपुर का वादा दोहराया।