
प्रयागराज से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ममता कुलकर्णी ने दावा किया है कि उन्होंने कल्कि अवतार को देखा है और भगवान परशुराम उन्हें युद्धकला का प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह बयान आध्यात्मिक जगत में चर्चा का केंद्र बन गया है।
ममता ने बताया कि सच्ची आध्यात्मिकता बाहरी आडंबरों से परे है। यह अंतरंग अनुभूति का विषय है। उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसी सच्चाइयां देखी हैं जो सांसारिक जीवन से परे हैं। कल्कि अवतार को परशुराम का मार्गदर्शन मिल रहा है।’ लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि सभी रहस्यों को उजागर करना ठीक नहीं।
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर सीधी चोट करते हुए उन्होंने कहा कि ऊंचे पद से पूर्व अहंकार त्याग आवश्यक है। अहंकार शेष रहा तो पद की गरिमा नष्ट हो जाती है।
अयोध्या राम मंदिर निर्माण पर बोलते हुए ममता ने पांच सदी के इंतजार के बाद आए इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत याद दिलाया। ‘सभी ने इसे अपनाया सिवाय शंकराचार्य के। उनके विरोध का फल ज्योतिष मठ के भूस्खलन के रूप में मिला, जो ईश्वरीय दंड था।’
सत्य को सर्वोच्च पुण्य बताते हुए उन्होंने कहा, धर्म का मूल सत्य ही है। झूठ जीवन को व्यर्थ बनाता है। 25 वर्षों से भगवा धारण कर ध्यान-तप में लीन ममता स्वयं को किसी पद से बंधा नहीं मानतीं।
राजनीति में कट्टरता का विरोध करते हुए उन्होंने धर्म को निजी रखने की वकालत की। शंकराचार्य के समाजवादी झुकाव पर सवाल उठाया कि सपा सत्ता में आई तो गोहत्या रुकेगी? पीएम मोदी को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए प्रियंका गांधी को राहुल से बेहतर माना।
ममता के विचार आध्यात्म, आलोचना और भविष्यदृष्टि का अनोखा संगम हैं।