
मदुरै। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने मंगलवार को भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ तिरुचि पुलिस की दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। यह मामला 2023 का है, जिसमें तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप था।
न्यायमूर्ति एस. श्रीमाथी ने फैसले में कहा कि स्टालिन के बयान घृणास्पद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मालवीय ने केवल मंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया दी थी। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाएगा।
कोर्ट ने डीके और डीएमके द्वारा पिछले 100 वर्षों से हिंदू धर्म पर हमलों का ऐतिहासिक संदर्भ भी गिनाया। सभी परिस्थितियों को देखते हुए मालवीय ने मंत्री के बयान के गहरे अर्थ पर सवाल उठाए थे।
डीएमके वकील विंग के केएवी थिनकरन की शिकायत पर आईपीसी की धारा 153, 153ए और 505(1)(बी) के तहत केस दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप था कि मालवीय ने स्टालिन के भाषण को विकृत कर 80 प्रतिशत आबादी के नरसंहार का आह्वान बताया और हिंदी में पोस्ट कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ा।
मालवीय की पोस्ट के बाद अयोध्या के संत ने स्टालिन का सिर कलम करने पर 10 करोड़ का इनाम घोषित किया। अभियोजन ने इसे घृणा फैलाने का प्रमाण बताया।
मालवीय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने केस रद्द कर दिया। यह फैसला राजनीतिक बयानों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करता है।