
भारतीय सिनेमा के इतिहास में महेंद्र कपूर का नाम देशभक्ति की उस अमर धुन से जुड़ा है, जो हर दिल को छू जाती है। ‘उपकार’ के ‘मेरे देश की धरती’ से लेकर ‘जय संतोषी मां’ तक, उनकी आवाज ने लाखों को प्रेरित किया। मुंबई में 1934 में जन्मे कपूर ने शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग ली। 1967 में ‘मेरे देश की धरती’ ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। उनकी विविधता लाजवाब थी – भक्ति गीतों से लेकर रोमांटिक नगमों तक। ‘पुरब और पश्चिम’ में ‘मैं अजनबी हूं’ वाली भावना ने उनके व्यक्तित्व को उजागर किया: देश के लिए हमेशा बेचैन, खुद को अजनबी बनाने को तत्पर। 2008 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी धुनें आज भी जीवंत हैं।