
मुंबई की झुग्गी बस्तियों में पहली मंजिल पर रहने वाले निवासियों के पुनर्वास की मांग ने महाराष्ट्र विधानसभा में जोर पकड़ा है। आवास मंत्री शंभूराज देसाई ने गुरुवार को सदन में बताया कि स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) योजनाओं के तहत इनकी पात्रता पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की जाएगी।
प्रश्नकाल में मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के अनुसार केवल भूतल के ढांचे ही पात्र माने जाते हैं। किसी बदलाव के लिए उच्च स्तरीय विचार-विमर्श जरूरी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शहरी विकास विभाग निर्देशानुसार आगे बढ़ेगा।
बिल्डरों द्वारा पहली मंजिल निवासियों से कथित समझौतों पर चिंता जताई गई। देसाई ने कहा कि कानून के विरुद्ध ऐसे करार अमान्य हैं। कानून की अज्ञानता कोई बचाव नहीं।
सभापति राहुल नार्वेकर ने सदस्यों के सुझाव रिकॉर्ड कराने के निर्देश दिए। देसाई ने आश्वासन दिया कि स्थिति और विचार शीर्ष नेतृत्व तक जल्द पहुंचाए जाएंगे।
मुंबई की करोड़ों झुग्गीवासी आबादी के बीच यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। पहली मंजिल को मान्यता देने से पुनर्वास व्यापक होगा, लेकिन परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। सरकार का फैसला शहरीकरण की दिशा तय करेगा।