
मुंबई। बुलढाणा जिले की विश्व प्रसिद्ध लोनार झील में जलस्तर के लगातार बढ़ने से आसपास के प्राचीन मंदिर डूब गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है। इस संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय वन्यजीव विभाग से तत्काल अनुमति लेकर झील का अतिरिक्त पानी निकालने की तैयारी में है।
वनमंत्री गणेश नाइक ने गुरुवार को विधानसभा में शिवसेना-यूबीटी के सिद्धार्थ खरात के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कहा कि शुक्रवार को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा रही है। झील का पानी गुलाबी और खारा हो गया है, जबकि इस वर्ष की भारी बारिश से जलस्तर 20-25 फीट तक उफान पर आ गया।
खरात ने बताया कि 41 लाख रुपये का प्रस्ताव पास हो चुका है, लेकिन वन्यजीव एवं पुरातत्व विभागों के बीच तालमेल न होने से काम अटका है। गायमुख, रामगया, पफेश्वर एवं कमलाजा देवी मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 से अब तक बारिश, भूमिगत स्रोतों की सक्रियता एवं कृषि अपवाह से जलस्तर 15-25 फीट बढ़ा।
क्रेटर के चारों ओर प्राकृतिक झरने सक्रिय हो गए, वहीं 600-700 फीट गहरे बोरवेल ने भूजल को प्रभावित किया। नाइक ने आश्वासन दिया कि संभागीय आयुक्त व कलेक्टरों संग चर्चा तेज है। क्षेत्र विकास के लिए 434 करोड़ आवंटित, 168 करोड़ खर्च।
रामसर स्थल एवं राष्ट्रीय भू-विरासत लोनार की रक्षा के लिए राज्य सतर्क है। जल निकासी से मंदिरों को बचाने एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।