
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानों को कर्ज के बोझ से मुक्ति दिलाने हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की अंतिम रिपोर्ट अभी विधानसभा में प्रस्तुत नहीं हुई है। सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने शुक्रवार को सदन में बताया कि 30 अक्टूबर 2025 को बनी इस समिति को तात्कालिक एवं दीर्घकालिक उपाय सुझाने का दायित्व सौंपा गया है।
शिवसेना-यूबीटी के भास्कर जाधव एवं भाजपा के प्रशांत ठाकुर आदि के प्रश्नों के लिखित उत्तर में मंत्री ने कहा कि समिति जून 2025 तक के कृषि ऋण, 30 सितंबर 2025 तक के बकाये एवं पिछले पांच वर्षों के नियमित चुकौती करने वाले किसानों के आंकड़ों की पड़ताल कर रही है।
54.63 लाख ऋण खातों में से 52.80 लाख के डेटा प्राप्त हो चुके हैं, जिनका कंप्यूटरीकृत विश्लेषण चल रहा है। 2017 की कर्जमाफी योजना में 50.60 लाख पात्रों में 44.04 लाख को लाभ मिला, शेष 6.56 लाख की प्रक्रिया जारी है।
महात्मा फुले योजना से 14.50 लाख किसानों को आधार सत्यापन पर प्रोत्साहन अनुदान दिया गया। खरीफ 2025 की बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सहकारी ऋण पुनर्गठन एवं एक वर्ष की वसूली रोक लगाई गई है।
निधि अभाव के आरोपों को खारिज करते हुए पाटिल ने बताया कि 3 दिसंबर 2025 को 2017 योजना के लिए कंप्यूटर सिस्टम मंजूर हुआ। शीतकालीन सत्र में 500 करोड़ एवं 2026-27 के लिए 5,175.51 करोड़ का बजट प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को आश्वासन दिया कि रिपोर्ट का इंतजार है एवं वादा पूरा होगा। उन्होंने बैंकिंग अनियमितताओं पर चिंता जताई, जहां पुराने खाते सक्रिय कर सरकारी धन की हेराफेरी होती रही।
ऐसी धांधली रोकने हेतु ‘कृषि-संग्रह’ डिजिटल प्रणाली विकसित हो रही है, जिसमें किसान पंजीकरण, भूमि रिकॉर्ड, 7/12 उतारा एवं आधार सत्यापन एकीकृत होगा। यह कदम किसानों को न्यायपूर्ण राहत सुनिश्चित करेगा।