
नई दिल्ली। महाशिवरात्रि का पावन पर्व आज देशभर में भक्तों द्वारा बड़ी श्रद्धा से मनाया जा रहा है। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह की स्मृति में उत्साहित करता है। पुराणों में वर्णित शिवजी की बारात का वर्णन सुनकर भक्त गद्गद हो जाते हैं।
महादेव दूल्हे के रूप में अपने भयंकर लेकिन अलौकिक स्वरूप में नजर आए। गले में सर्प, शरीर पर भस्म, हाथों में डमरू-त्रिशूल, नंदी पर सवार। बारात में देवता तो थे ही, भूत-प्रेत, पिशाच, योगिनियां और विचित्र शिवगण भी थे। कुछ के मुख न थे, कुछ के चार नेत्र या बहु-मुख, कोई बहु-बाहु तो कोई निरंग। मोटे-दुबले आकृतियां, सांप-बिच्छू संग।
यह दृश्य देख पार्वती के परिजन स्तब्ध। मां मेनावती बेहोश। नगरवासी भयभीत। बारात का भार इतना कि पृथ्वी अपनी धुरी से सरक गई। संतुलन के लिए शिव ने अगस्त्य ऋषि को दक्षिण भेजा। हिमालय पहुंचे तो ब्रह्मा-विष्णु आगे। वैदिक विधि से विवाह संपन्न।
मेनावती ने नारद को कोसा, किंतु पार्वती का प्रेम अडिग। आज भक्त शिवलिंग पर दूध-जल, बेलपत्र चढ़ाते हैं, रात्रि जागरण में कथा सुनाते हैं। शिव महापुराण और रामचरितमानस की यह कथा सुख-शांति प्रदान करती है। यह पर्व जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति का संदेश देता है।