
मद्रास हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तीसरी संतान के जन्म पर भी पूर्ण वेतन के साथ मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए। यह निर्णय हाईकोर्ट की कर्मचारी बी. मंगैयारकरसी की याचिका पर आया, जिन्हें तीसरे बच्चे के जन्म पर छुट्टी नहीं मिली थी।
जस्टिस आर. सुरेश कुमार और जस्टिस शमीम अहमद की बेंच ने मामले की सुनवाई की। दौरान यह सामने आया कि तमिलनाडु सरकार के नियमों में तीसरे बच्चे के लिए अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है। फिर भी, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए बेंच ने हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को एक वर्ष का पूर्ण वेतन वाली छुट्टी देने का आदेश दिया।
कोर्ट ने भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए सभी जिला अदालतों के रजिस्ट्रारों को सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही, तमिलनाडु के मुख्य सचिव को इस आदेश की प्रति भेजकर सभी विभागों में इसका पालन सुनिश्चित करने को कहा।
यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता को राहत देता है, बल्कि पूरे राज्य में कामकाजी महिलाओं के लिए मिसाल कायम करता है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप यह कदम मातृत्व अधिकारों को मजबूत बनाता है।
कामकाजी माताओं के लिए यह एक बड़ा कदम है, जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा। उम्मीद है कि अन्य संस्थाएं भी इस दिशा में कदम उठाएंगी।