
चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में भूचाल मचाने वाला मामला सामने आया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने नगर प्रशासन और जल आपूर्ति मंत्री केएन नेहरू के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी विभाग (डीवीएसी) को एफआईआर दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की अगुवाई वाली बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
ईडी की अक्टूबर 2025 में दर्ज शिकायत में विभाग में भर्तियों और टेंडर प्रक्रिया में 630 से 1020 करोड़ रुपये की भ्रष्टाचार की बात कही गई। इसमें 2538 नियुक्तियों के लिए प्रति पद 25 से 35 लाख रुपये तक रिश्वत वसूली का दावा किया गया। छापों में व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट, स्थानांतरण आदेश और वित्तीय दस्तावेज बरामद हुए, जो मंत्री से जुड़े लोगों से लिंक करते हैं।
इस फैसले के बाद तमिलनाडु भाजपा ने डीएमके सरकार पर हमला बोला। प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कहा कि यह डीएमके के लिए करारा प्रहार है। उन्होंने सीएम एमके स्टालिन से नेहरू को कैबिनेट से हटाने और सीबीआई जांच की मांग की। प्रसाद ने कहा कि डीएमके राज में भ्रष्टाचार महामारी बन चुका है।
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा दोनों दलों के बीच जंग को तेज कर सकता है। डीएमके की ओर से अभी चुप्पी है, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि एफआईआर का मतलब अपराध सिद्ध होना नहीं। डीवीएसी को अब तुरंत कार्रवाई शुरू करनी होगी, जो विभाग में गहरी जांच का आधार बनेगी।
यह मामला तमिलनाडु में प्रशासनिक सुधारों की जरूरत को रेखांकित करता है, जहां राजनीतिक हस्तक्षेप भ्रष्टाचार का बड़ा कारण बन रहा है। आने वाले दिनों में इसकी राजनीतिक गूंज पूरे राज्य में सुनाई देगी।