
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मदन पूरी को लंबी बीमारी से उबरने के बाद फिल्मों में वापसी करना बेहद कठिन लगा। उन्होंने खुलासा किया कि मुख्य भूमिकाएं क्यों छोड़नी पड़ीं और सहायक किरदारों की ओर क्यों रुख करना पड़ा।
बीमारी ने उनके करियर को गहरा आघात पहुंचाया। कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद जब वे सेट पर लौटे, तो निर्देशकों का रवैया बदल चुका था। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण हीरो की भूमिकाएं मिलना मुश्किल हो गया।
‘मुझे फिर से अपनी क्षमता साबित करनी पड़ी,’ मदन ने कहा। प्रोड्यूसर्स ने युवा और तंदुरुस्त कलाकारों को प्राथमिकता दी। ऐसे में खलनायकी और पिता जैसे सहायक रोल ही बचे, जिनमें उनकी अभिनय कला चमक उठी।
इस बदलाव ने उनके करियर को नई दिशा दी। दीवार, शोले जैसी फिल्मों में उनके विलेन बने अमर। चार सौ से अधिक फिल्मों में योगदान देकर उन्होंने साबित किया कि साइड रोल भी मुख्य हो सकते हैं।
मदन पूरी की कहानी संघर्ष और पुनरागमन की मिसाल है। यह भावी कलाकारों को प्रेरित करती है कि विपरीत परिस्थितियां भी सफलता के नए द्वार खोल सकती हैं।