
देश में रसोई गैस की भारी किल्लत ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। केंद्र सरकार भले ही सप्लाई सामान्य होने का दावा कर रही हो, लेकिन विपक्ष इसे आमजन की तकलीफ छिपाने का बहाना बता रहा है। संसद से लेकर सड़कों तक गूंज रही हैं आवाजें।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तंज कसते हुए कहा कि कोविड की तरह लड़ेंगे तो प्लान क्या है? राम मंदिर की रसोई बंद, दिल्ली हाईकोर्ट कैंटीन ठप, घर-घर डर का साया। उन्होंने खुली चुनौती दी- गैस बुक करो, नहीं आएगी।
आरएलपी के हनुमान बेनीवाल ने महंगाई, बेरोजगारी और किसान संकट के साथ जोड़ते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। सपा के अवधेश प्रसाद ने अयोध्या की सीता रसोई बंद होने को आजादी के बाद का पहला काला अध्याय बताया। 15 मार्च को अयोध्या में धरना देने का ऐलान किया।
डिंपल यादव ने यूपी में घरेलू व कमर्शियल गैस की मार पर जोर दिया, जहां ब्लैकमार्केटिंग जोर पकड़ चुकी। टीएमसी की डोला सेन ने सड़क व संसद में माताओं-बहनों के लिए हाहाकार पर प्रदर्शन किए।
ईरान का भारतीय जहाजों को रास्ता देने का फैसला सराहा कांग्रेस के विवेक तन्खा ने। हर्षवर्धन श्रृंगला ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता बताई, जबकि टीडीपी के लावू ने मोदी की तटस्थता को सफलता का श्रेय दिया।
सरकार ने कोविड प्रबंधन का हवाला देकर भरोसा जगाने की कोशिश की। यह संकट सियासत व जनजीवन दोनों को हिला रहा है।