
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब्स घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय कर दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने 52 अन्य आरोपी लोगों के खिलाफ केस चलाने लायक पर्याप्त सबूत न मिलने का फैसला सुनाया।
यह मामला 2004-2009 के दौरान लालू यादव के रेल मंत्रित्व काल से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई की जांच में सामने आया कि रेलवे की नौकरियों के बदले बिहार में जमीनें लालू परिवार को सौंप दी गईं। पटना सहित कई जगहों पर करोड़ों कीमत की जमीनें नाममात्र के दामों या गिफ्ट डीड के जरिए हस्तांतरित हुईं।
स्पेशल जज गीतांजलि वर्मा ने चार्जशीट में दर्ज साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। लालू परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आईपीसी की धारा 420, 120बी समेत कई धाराओं में आरोप बनाए गए हैं। दूसरी ओर निचले स्तर के रेलवे कर्मचारी, बिचौलिए और जमीन मालिकों के खिलाफ सबूत कमजोर पाए गए।
स्वास्थ्य कारणों से लालू कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिर हुए। राबड़ी देवी और तेजस्वी भी पेश हुए। आरजेडी नेताओं ने इसे बीजेपी का राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। वकीलों ने हाईकोर्ट जाने का ऐलान किया है।
बिहार की सियासत में भूकंपकारी फैसला आया है। महागठबंधन पर भ्रष्टाचार का दाग गहरा गया है। तेजस्वी यादव, जो उपमुख्यमंत्री हैं, के राजनीतिक करियर पर सबसे बुरा असर पड़ेगा। 2025 विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि 1.5 लाख वर्गफुट से ज्यादा जमीन लालू परिवार को मिली। रेलवे के ग्रुप डी पदों पर अवैध नियुक्तियां हुईं। कोर्ट के इस फैसले से मुकदमे का दायरा सीमित हो गया है।
अब सबूत पेश करने और गवाहों की जांच का दौर शुरू होगा। लालू परिवार निर्दोषता का दावा करते हुए कड़ी कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार है। यह केस बिहार राजनीति के भविष्य को तय करने वाला साबित हो सकता है।