
पूर्व आर्मी पत्नी खुशबू पाटनी ने कश्मीर के अशांत इलाकों में बिताए वर्षों की मार्मिक यादें साझा की हैं। उनके पति के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती के दौरान कई रातें ऐसी रहीं जब नींद आंखों से कोसों दूर थी।
पहाड़ी इलाकों के शिविरों में रहते हुए, दूर कहीं गोलियों की आवाज या हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट ही साथी बनती। ‘हर पल सतर्कता का था,’ उन्होंने बताया। मिलिटेंसी प्रभावित क्षेत्रों में जीवन चुनौतियों से भरा था, लेकिन सैनिकों की वीरता प्रेरणा देती।
परिवार के सदस्यों ने भी अनेक त्याग किए। ब्लैकआउट, बार-बार स्थानांतरण और हमलों का खतरा – इन सबके बीच खुशबू ने हिम्मत दिखाई। त्योहारों पर सीमित साधनों से जश्न मनाना और पत्रों से मिला प्यार आज भी यादगार है।
आज कश्मीर में शांति प्रयास जारी हैं। खुशबू की कहानी सैन्य परिवारों के योगदान को रेखांकित करती है। यह देशभक्ति की मशाल जलाए रखने वाली प्रेरक कथा है।