
हैदराबाद। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना सरकार के हैदराबाद, गजवेल और नलगोंडा नगर निगमों के विभाजन को पूरी तरह अवैध ठहराया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की जनगणना अधिसूचना के बाद जारी निर्देशों का यह खुला उल्लंघन है।
मीडियाकर्मियों से बातचीत में रेड्डी ने बताया कि देशव्यापी आदेश स्पष्ट था जिसमें राजस्व ग्रामों और वार्डों का बंटवारा न करने को कहा गया। फिर भी राज्य सरकार ने इसे अनदेखा कर यह कदम उठाया।
जनगणना निदेशालय के नियमों के अनुसार 31 दिसंबर 2025 से मई 2027 तक कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। भाजपा नेता ने राज्य सरकार पर इनका पालन न करने का आरोप लगाया।
नगर निगम चुनावों के दौरान आईएएस अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर तबादले चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन हैं। जीएचएमसी को तीन भागों में बांटना भी नियमों के विरुद्ध है।
निगम मुख्यालय से दूर के गांवों को नए निगमों में डालने से ग्रामीण गरीबों के रोजगार गारंटी योजनाओं का लाभ छिन जाएगा। 2007 में 650 वर्ग किमी वाले जीएचएमसी का क्षेत्र अब 2053 वर्ग किमी हो गया, बिना पर्याप्त योजना या धन के।
यह निर्णय जनता की राय लिए बिना लिया गया। बाहरी रिंग रोड की सीमा का पालन न कर हवाई अड्डा, बीएचईएल जैसे क्षेत्र बाहर रखे गए, जबकि एआईएमआईएम प्रभावित इलाकों को राजनीतिक दबाव में शामिल किया।
किशन रेड्डी के बयान से राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।