
नई दिल्ली। खान अब्दुल गफ्फार खान की पुण्यतिथि पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस महान स्वतंत्रता सेनानी को नमन किया। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने कहा कि बाचा खान ने भारत की आजादी की लड़ाई में अतुलनीय योगदान दिया। अपने अहिंसा और सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए उन्होंने कई बार जेल की सलाखों के पीछे समय बिताया।
खड़गे ने लिखा, ‘भारत रत्न से सम्मानित फ्रंटियर गांधी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी में लंबे समय तक सेवा की और संविधान सभा के सदस्य बने। उनकी अहिंसा, सद्भाव और मानव गरिमा के प्रति निष्ठा आज भी पूरे उपमहाद्वीप में प्रेरणा स्रोत है।’
1890 में वर्तमान पाकिस्तान के उस्मानजई में जन्मे खान ने कम उम्र से ही शिक्षा प्रसार में जुट गए। मात्र 20 वर्ष की आयु में उन्होंने पहला स्कूल खोला। रॉलेट एक्ट के खिलाफ आंदोलन से वे स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हुए और गांधीजी से मिले।
खिलाफत आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1929 में खुदाई खिदमतगार (लाल कुर्ती) आंदोलन शुरू किया, जो कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा। 1920 से 1947 तक बार-बार गिरफ्तारियां झेलीं। 1987 में पहले गैर-भारतीय के रूप में भारत रत्न पाए। 20 जनवरी 1988 को पेशावर में निधन, जलालाबाद में दफन। उनका जीवन एकता का प्रतीक है।