
कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को ‘द केरल स्टोरी 2: गो बियॉन्ड’ फिल्म के खिलाफ दायर जनहित याचिका के याचिकाकर्ताओं को जजों पर लगाए गए आरोपों को लेकर कड़ी फटकार लगाई। चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस वीएम श्याम कुमार की बेंच ने कहा कि अन्य बेंचों या जजों पर इस तरह के इल्जाम न्याय व्यवस्था के लिए घातक हैं और यह अदालत की अवमानना का सबब बन सकता है।
याचिका सामाजिक कार्यकर्ता केसी चंद्रमोहन और वकील मेहनाज पी मोहम्मद ने दायर की थी। उन्होंने फिल्म पर केरल को बिना सबूत के आतंकवाद का गढ़ दिखाने का आरोप लगाया। फिल्म में 150 से अधिक मुस्लिम पात्रों को नकारात्मक और इस्लामोफोबिक ढंग से चित्रित करने का विरोध किया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह शांतिप्रिय मुस्लिमों की वास्तविकता को नजरअंदाज करती है और टाइटल केरल की छवि बिगाड़ता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
26 फरवरी को सिंगल जज बेंच ने रिलीज पर अस्थायी रोक लगाई थी। फिल्ममेकर्स ने अगले ही दिन अपील की, जिसे जस्टिस एसए धर्माधिकारी और पीवी बालकृष्णन की बेंच ने हटा दिया। याचिका में अपील की तेजी पर सवाल उठे, क्योंकि सिंगल जज का आदेश वेबसाइट पर अपलोड भी नहीं हुआ था। चीफ जस्टिस ने इसे जजों पर बिना पूरी जानकारी के हमला बताया।
अदालत ने असहमति होने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी, लेकिन न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने तत्काल माफी मांगी और विवादित हिस्सों को हटाने का वादा किया। यह मामला फिल्मों की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन को रेखांकित करता है।