
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हिंदू मंदिरों की विशाल संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कानून बनाने का सख्त निर्देश दिया है। यह फैसला मंदिर भूमियों पर अवैध कब्जे और लापरवाही की बढ़ती घटनाओं के बीच आया है, जो दक्षिण भारत की सांस्कृतिक धरोहर को खतरे में डाल रही हैं।
कोर्ट ने ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के तहत 3,000 से अधिक मंदिरों की संपत्तियों पर गौर किया, जहां करोड़ों की जमीनें खो चुकी हैं। जस्टिस ए.के. जयसंकरेन नंबियार और श्याम कुमार की बेंच ने मौजूदा व्यवस्थाओं को अपर्याप्त बताते हुए छह माह में विधेयक पेश करने का आदेश दिया।
याचिका में तिरुवनंतपुरम और एर्नाकुलम जैसे क्षेत्रों में प्रमुख भूमियों पर कब्जों का जिक्र था। कोर्ट ने डिजिटल इन्वेंटरी, एंटी-एंक्रोचमेंट अभियान और सख्त सजाओं के प्रावधानों वाली कानून की रूपरेखा सुझाई। विशेषज्ञ समिति गठित कर वर्तमान स्थिति का आकलन करने को कहा गया।
हिंदू संगठनों ने स्वागत किया है, इसे मंदिरों की खोई निजी को पुनः प्राप्ति की दिशा में कदम बताया। सरकार ने न्यायिक आदेश का पालन करने का भरोसा दिलाया।
यह निर्णय अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां धार्मिक संपत्तियों का यही हाल है। केरल में धर्मनिरपेक्ष शासन और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। मंदिर संपदा अब न केवल पूजा का केंद्र बनेगी, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का स्रोत भी।
