
केरल विधानसभा चुनावों के ठीक पहले सबरीमला मंदिर विवाद ने फिर से जोर पकड़ लिया है। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने सोमवार को महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में दिए गए अपने पुराने हलफनामे को वापस लेने का ऐलान किया। बोर्ड अध्यक्ष के. जयकुमार ने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट में मंदिर की प्राचीन परंपराओं की रक्षा का पक्ष रखा जाएगा।
यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों की याद दिलाता है, जब सीपीआई-एम सरकार का रुख भारी विरोध का शिकार हुआ था। सीएम पिनारायी विजयन ने महिलाओं के दर्शन के लिए अभियान चलाया, लेकिन श्रद्धालुओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 14 मार्च तक सभी पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। नौ जजों की बेंच 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी, जो 22 अप्रैल तक चलेगी। केंद्र सरकार पहले ही पुनर्विचार याचिका का समर्थन कर चुकी है।
67 संबंधित याचिकाओं में अनुच्छेद 25-26, धार्मिक प्रथाओं, संवैधानिक नैतिकता जैसे मुद्दे उठेंगे। बोर्ड का यह कदम चुनावी ध्रुवीकरण रोकने की कोशिश माना जा रहा है। राज्य सरकार के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।
सबरीमला का यह विवाद आस्था और कानून के बीच टकराव को उजागर करता रहेगा।