
तिरुवनंतपुरम। केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को राज्यपाल राजेंद्र वी. आर्लेकर से प्रस्तावित मलयालम भाषा विधेयक को जल्द से जल्द मंजूरी देने की पुरजोर अपील की। उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक पहचान मजबूत करने और मलयालियों के आत्मसम्मान को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम करार दिया।
चंद्रशेखर के मुताबिक, यह विधेयक प्रशासनिक कार्यों में मलयालम को प्राथमिक भाषा बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान सांस्कृतिक हस्तियों ने राज्य के नाम को ‘केरल’ मान्यता देने पर आभार जताते हुए इस विधेयक की मंजूरी की मांग की थी।
इस कानून से केरल और मलयालम भाषा दोनों की गरिमा बढ़ेगी तथा लोगों में नई ऊर्जा का संचार होगा। भाजपा नेता ने तर्क दिया कि जैसे नाम परिवर्तन से पहचान मजबूत हुई, वैसे ही सरकारी दस्तावेजों और सेवाओं में मलयालम के उपयोग से प्रशासन और जनता के बीच संवाद सशक्त बनेगा।
इससे शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुलभ और कारगर होगी, जिसका सीधा असर जनभागीदारी पर पड़ेगा। चंद्रशेखर ने कहा कि आधिकारिक कार्यों में मलयालम को प्रमुखता देने से नई पीढ़ी भाषा से गहरा जुड़ाव महसूस करेगी और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा होगी।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम अन्य भाषाओं को कमतर नहीं ठहराता। अंग्रेजी व हिंदी युवाओं की पढ़ाई व करियर के लिए जरूरी रहेंगी। भाषाई अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन, स्पष्ट दिशानिर्देश, अनुवाद व्यवस्था तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष उपाय आवश्यक हैं।