
दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली आबकारी नीति मामले को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को पत्र लिखकर सीबीआई की पुनर्विचार याचिका को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से हटाकर दूसरी बेंच को सौंपने की मांग की है। यह कदम ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया है जिसमें 23 सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था, जिनमें केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल हैं।
सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस शर्मा की बेंच ने हाल ही में केजरीवाल, सिसोदिया समेत अन्य को नोटिस जारी किए और जांच अधिकारी व एजेंसी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक लगा दी। अदालत ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई अगले हफ्ते हो सकती है।
ईडी ने भी ट्रायल कोर्ट की अपनी आलोचना वाली टिप्पणियां हटाने की याचिका दाखिल की है। एजेंसी का तर्क है कि फैसला सुनाए जाने के समय वह पक्षकार नहीं थी। सरकार की ओर से ASG एसवी राजू ने कहा कि ये टिप्पणियां ईडी की पीएमएलए जांच को प्रभावित कर सकती हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ईडी की याचिका सीबीआई केस के साथ ही सुनी जाएगी।
आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं का आरोप था कि निजी शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बदलाव किए गए और रिश्वत ली गई। ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि नीति तय प्रक्रिया से बनी थी।
केजरीवाल की यह मांग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर चुनावों के समय। मामला अब न्यायिक निष्पक्षता के सवालों को जन्म दे रहा है।