
हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपनी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) को बचाने के लिए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच पानी विवाद पैदा कर रहे हैं। केसीआर क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काकर और आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू का नाम लेकर बीआरएस को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने केसीआर पर सिंचाई परियोजनाओं में फंड हेराफेरी के सवालों से बचने के लिए विधानसभा से गैरहाजिर रहने का भी आरोप लगाया। एक महत्वपूर्ण बैठक में बोलते हुए रेवंत रेड्डी ने सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी की पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन का हवाला दिया, जिसमें नदी जल और सिंचाई मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी गई। यह प्रेजेंटेशन विधानसभा में बीआरएस के हमलों का जवाब देने के लिए तैयार किया गया था।
सीएम ने केसीआर को विधानसभा में आकर बहस करने की खुली चुनौती दी। उन्होंने तेलंगाना आंदोलन के मूल उद्देश्य पानी के अधिकारों को याद दिलाते हुए कहा कि बीआरएस के 10 साल के शासन में कृष्णा और गोदावरी नदियों के पानी का पूरा उपयोग होता तो राज्य बहुत आगे होता। अविभाजित आंध्र प्रदेश को 811 टीएमसी कृष्णा जल मिला था, बंटवारे के बाद आंध्र को 512 टीएमसी और तेलंगाना को 299 टीएमसी आवंटित हुआ। केसीआर ने ही इस पर दस्तखत किए थे, जो आंध्र के लिए फायदेमंद साबित हुए – 66% आंध्र को, 34% तेलंगाना को।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि कृष्णा नदी के बहाव विश्लेषण से तेलंगाना को 71% पानी मिलना चाहिए, लेकिन केसीआर ने मजबूत दावा नहीं किया। अब कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड भी 299 टीएमसी की पुष्टि कर रहा है। चुनावी हार के बाद बीआरएस का अस्तित्व संकट में है, और केसीआर विवादास्पद तरीके से पार्टी बचाने में जुटे हैं। तेलंगाना पानी विवाद, कृष्णा गोदावरी जल बंटवारा, बीआरएस संकट जैसे मुद्दे अब राजनीतिक रंग ले चुके हैं।