
मुंबई, 15 फरवरी। भारतीय टेलीविजन की दुनिया को नई दिशा देने वाली कविता चौधरी का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया। ‘सर्फ’ के विज्ञापनों में ललिता जी और धारावाहिक ‘उड़ान’ की रचयिता के रूप में अमर कविता ने गृहिणी को समझदार खरीदार बनाया और बेटियों को सशक्तिकरण का पाठ पढ़ाया।
1978 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निकलीं कविता ने अनुपम खेर, सतीश कौशिक जैसे सितारों के साथ पढ़ाई की। उनकी दोस्ती का कमाल था ‘उड़ान’, जहां सतीश ने निर्देशन किया। यह सीरीज उनकी बहन कंचन चौधरी भट्टाचार्य की आईपीएस यात्रा से प्रेरित थीं, जो किरण बेदी के बाद दूसरी महिला अधिकारी बनीं।
कल्याणी सिंह का किरदार (रामा विज) जब परिवार की तबाही के बाद सिस्टम से लड़ता है, तो लैंगिक समानता का संदेश घर-घर पहुंचा। पिता (विक्रम गोखले) का बेटी को बराबर मानना लाखों लड़कियों को सिविल सेवा की ओर प्रेरित करने वाला सीन आज भी जीवंत है।
‘ललिता जी’ ने 80 के दशक में निरमा को टक्कर दी। ‘सर्फ की खरीदारी में ही समझदारी है’ उनका संवाद मध्यम वर्ग का मंत्र बन गया। कविता ने कभी समझौता नहीं किया, ‘योर ऑनर’ और ‘आईपीएस डायरीज’ जैसे शो इसका प्रमाण हैं।
अंतिम दिनों में भी उनकी आंखों में कल्याणी सी चमक बनी रही। उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत लाखों दिलों में बसी रहेगी।