
चेन्नई। तमिलनाडु की महत्वाकांक्षी 14,000 करोड़ रुपये की नदंथाई वाझी कावेरी नदी पुनर्स्थापन परियोजना, जो पारिस्थितिकी और सिंचाई के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है, प्रशासनिक व वित्तीय बाधाओं के कारण आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शुरू होने की संभावना न के बराबर है।
एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने डीएमके सरकार पर योजना को जानबूझकर लटकाने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक रंग दे दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन राज्य स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत जटिलताएं ही देरी का कारण हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘वित्त विभाग की मंजूरी बाकी है। जल संसाधन, जलापूर्ति बोर्ड, बिजली कंपनी और राजस्व समेत 12 विभागों का समन्वय जरूरी है। इतने बड़े प्रोजेक्ट को चुनाव पूर्व शुरू करना असंभव है।’
राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय ने पहले चरण के लिए 934 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिसमें केंद्र का 60 प्रतिशत (560 करोड़) और राज्य का 40 प्रतिशत (374 करोड़) हिस्सा है। पहले चरण में मेटूर से तिरुची तक 1,092 किलोमीटर कावेरी और सहायक नदियों का जीर्णोद्धार होगा। बाकी 214 किमी दूसरे चरण में।
डेल्टा के किसान परेशान हैं। तिरुवरूर के एम. रामासामी ने कहा, ‘औद्योगिकरण से नदी प्रदूषित हो गई। मछलियां कम हुईं, फसलें बर्बाद, पीने का पानी खराब। पहले की तरह नदी नहीं रही।’ उन्होंने प्रदूषण रिपोर्टों का जिक्र किया।
योजना में सीवेज प्लांट, कपड़ा उद्योगों के लिए अपशिष्ट उपचार और तट सुधार शामिल हैं। कावेरी डेल्टा किसान संघ के अध्यक्ष केवी एलंकीरन बोले, ‘अंतिम जिलों में पानी की कमी से एक ही फसल होती है। यह परियोजना कृषि को नया जीवन देगी।’
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच परियोजना का भविष्य अधर में लटक गया है, जो तमिलनाडु की विकास प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।