
बेंगलुरु में बुधवार को कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर साफ लफ्जों में अपनी राय रखी। समर्थकों द्वारा उनके नाम की जोरदार पैरवी को वे गलत नहीं मानते, लेकिन अंतिम निर्णय का हकदार बताया कांग्रेस हाईकमान को।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सड़कों पर नहीं, बल्कि बंद कमरों में हाईकमान की बैठकों में तय होगा। विधायक दल की राय ली जाएगी और विभिन्न पहलुओं पर विचार कर फैसला लिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नाम प्रस्तावित करना या राय जाहिर करना बदलाव नहीं लाएगा।
‘मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं,’ परमेश्वर ने कहा। मीडिया में मुख्यमंत्री बनने की मांग उठाना केवल बहस बढ़ाएगा। उन्होंने अपनी योग्यता पर सवाल उठाने वालों को ललकारा- आठ साल तक पीसीसी की कमान संभाली, दो बार पार्टी को सत्ता दिलाई, उपमुख्यमंत्री भी रहे। क्या ये सब बिना क्षमता के संभव?
सतीश जारकीहोली या केएन राजन्ना से कोई मुलाकात नहीं हुई, उन्होंने स्पष्ट किया। दिल्ली उनके लिए नई नहीं। राजनीतिक जरूरत पर जाएंगे, राहुल-सोनिया या खड़गे से मिलने का समय उनके अनुसार तय करेंगे।
कर्नाटक कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच परमेश्वर का यह बयान एकता का संदेश देता है। हाईकमान का फैसला तय करेगा कि राज्य की सियासत का रुख किस ओर मुड़ेगा।