कर्नाटक सरकार ने परिसीमन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राज्य का कहना है कि केवल आबादी के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करना अन्यायपूर्ण होगा। दक्षिणी राज्यों के लिए यह खतरा बन गया है।

परिसीमन का मतलब है लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनः निर्धारण। लेकिन कर्नाटक सरकार का तर्क है कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन में सफलता हासिल की, उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए। ‘हमने जनसंख्या नियंत्रण में अपनी जिम्मेदारी निभाई, अब इसके लिए सांसदों की संख्या कम हो, यह स्वीकार्य नहीं’ – एक मंत्री ने कहा।
2026 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होने वाली इस प्रक्रिया से कर्नाटक को 3-5 लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं। वहीं उत्तर भारत के राज्य अपनी बढ़ती आबादी के कारण अधिक सीटें पा सकते हैं।
सरकार ने परिसीमन आयोग को पत्र लिखकर नया फॉर्मूला सुझाया है। इसमें साक्षरता दर, विकास सूचकांक और भौगोलिक चुनौतियों को भी शामिल किया जाए। राज्य स्तर पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है।
यह विवाद भारत की राजनीतिक संरचना को प्रभावित करेगा। दक्षिणी राज्य एकजुट हो रहे हैं। केंद्र सरकार को अब संतुलित रुख अपनाना होगा। अन्यथा संघीय ढांचे में दरार पड़ सकती है।
