
बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्वीकार किया है कि राज्य अपनी 320 किलोमीटर लंबी तटरेखा का पूर्ण उपयोग करने में असफल रहा है। एक विकास सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पर्यटन, मत्स्य पालन और औद्योगिक विकास की अपार संभावनाओं के बावजूद इस क्षेत्र का प्रभावी सदुपयोग नहीं हो सका। शिवकुमार ने बुनियादी ढांचे की कमी और नियामक बाधाओं को मुख्य कारण बताया। उन्होंने गोवा और केरल जैसे पड़ोसी राज्यों के सफल मॉडल का हवाला देते हुए नई नीति की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार अब तटीय क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और संसाधन प्रबंधन में सुधार के लिए व्यापक योजना बनाने पर विचार कर रही है।