
बेंगलुरु की विधानसभा और विधान परिषद में बुधवार को जोरदार राजनीतिक घमासान मचा। दोनों सदनों ने केंद्र की ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम’ की कड़ी निंदा वाले प्रस्ताव को पारित कर दिया। इसमें महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई। भाजपा-जेडीएस सदस्यों के तीव्र विरोध के बीच यह प्रस्ताव पास हुआ, जिन्होंने वोटिंग का बहिष्कार कर वॉकआउट किया।
ग्रामीण विकास मंत्री प्रियांक खरगे ने बहस में कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी ने मनरेगा की सराहना की थी। उन्होंने नए ‘वीबी जीराम जी’ अधिनियम पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को भी इसकी पूरी जानकारी नहीं। विपक्ष नेता आर अशोक ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि सात दिन का नोटिस और चर्चा जरूरी थी। उन्होंने मनरेगा में कांग्रेस के भ्रष्टाचार के आंकड़े गिनाए- 2023-24 में 16,019 करोड़ का दुरुपयोग।
स्पीकर यूटी खादर और अध्यक्ष बसवराज होरटी ने वोटिंग कराई, जिसमें सत्ताधारी दल बहुमत से जीता। सीएम सिद्धरमैया ने कहा कि राज्यों से बिना चर्चा 60:40 फंडिंग थोपी गई और गांधीजी का नाम हटाना अपमान है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।
केंद्र का कहना है कि योजना में 100 से 125 दिन का काम बढ़ा है, व्यापक परामर्श हुए। लेकिन कर्नाटक इसे मनरेगा पर हमला मानता है। यह विवाद केंद्र-राज्य संबंधों में दरार दिखाता है, जहां ग्रामीण रोजगार की गारंटी दांव पर है।
