
करौली सरकार ने एक साहसिक प्रस्ताव रखा है। भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ के बजाय ‘सनातन राष्ट्र’ घोषित करने की मांग उठाई गई है। यह कदम देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को प्रतिबिंबित करने का प्रयास है।
नेताओं का कहना है कि सनातन शब्द वेदों और उपनिषदों की शाश्वत धार्मिक परंपराओं को समाहित करता है। यह आधुनिक धार्मिक सीमाओं से परे व्यापक दर्शन प्रस्तुत करता है। जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि प्राचीन राज्य सनातन मूल्यों पर आधारित थे।
एक सार्वजनिक सभा में वरिष्ठ मंत्री ने घोषणा की, ‘सनातन राष्ट्र विविध परंपराओं को एकजुट करेगा।’ इस मांग ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है।
विपक्ष इसे विकास मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला बताता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘यह शासन नहीं, बयानबाजी है।’ हिंदू संगठन समर्थन में उतर आए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार संविधान संशोधन संसदीय सहमति मांगेगा। पिछले प्रयास विफल रहे थे। फिर भी, करौली की पहल ने राष्ट्रीय चेतना को झकझोर दिया है। भविष्य में यह विधेयक बन सकता है या नहीं, लेकिन विचारधारा की लड़ाई तेज हो गई है।