
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में शुक्रवार को गहरा शोक छा गया जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व खाद्य मंत्री कमर अली अखून का निधन हो गया। कारगिल के संगरा गांव से ताल्लुक रखने वाले अखून लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाकों की आवाज थे। उन्होंने दशकों तक क्षेत्रीय विकास के लिए संघर्ष किया।
सभी दलों के सांसदों ने उनके जनकल्याण योगदान की सराहना की। दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं को विधानसभा और संसद तक पहुंचाने में उनकी भूमिका सराहनीय रही। खाद्य आपूर्ति की चुनौतियों से निपटने में उनके प्रयासों ने उच्च ऊंचाई वाले गांवों को राहत दी।
अखून का राजनीतिक सफर जमीन से जुड़ा था। प्रशासनिक अनुभव के दम पर उन्होंने बुनियादी सुविधाओं, स्वास्थ्य और शिक्षा के मुद्दों पर लगातार पहल की। कई सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के निवासियों तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही।
परिवार के मुताबिक, लंबी बीमारी के बाद इलाज के दौरान उनका स्वर्गवास हो गया। निधन की खबर फैलते ही सैकड़ों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उन्हें सच्चा समाजसेवी बताया जो हमेशा गरीबों के लिए खड़े रहे।
विधायक सज्जाद शाहीन ने एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अखून साहब के जाने से जेकेएम के राजनीतिक परिदृश्य में अपूरणीय क्षति हुई है। उनके परिवार को सांत्वना देते हुए उन्होंने दुआ की कि अल्लाह उन्हें जन्नत नसीब करे। कारगिल अब उनके योगदान को याद कर रहा है।