
नई दिल्ली। तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद और प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन ने बुधवार को उच्च सदन में अपने पहले भाषण से सभी को प्रभावित किया। राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए उन्होंने लोकतंत्र की जड़ों, मतदाता अधिकारों, भाषा-संस्कृति और संघीय ढांचे पर गहन चिंता जताई।
परमकुड़ी के एक साधारण बच्चे के रूप में अपनी शुरुआत बताते हुए हासन ने कहा कि सिनेमा ने उन्हें तमिल भाषा, इतिहास और सामाजिक जागरूकता से जोड़ा। राज्यसभा को विभिन्न क्षेत्रों की आवाज का प्रतीक बताते हुए उन्होंने भाषण को भावुक, वैचारिक और संवैधानिक आयाम दिया।
मतदाता सूची की खामियों पर सबसे तीखा प्रहार किया। गलत वर्तनी या तकनीकी गड़बड़ियों से लाखों नाम कट रहे हैं, जिन्हें उन्होंने ‘कागजी मुर्दे’ कहा। बिहार में संकट चरम पर, बंगाल में अदालती लड़ाई और तमिलनाडु में खतरा मंडरा रहा है। वोटिंग को लोकतंत्र का मूल अधिकार बताते हुए कहा कि छोटी भूलों से इसे छीनना अपराध है।
सरकारें अमर नहीं होतीं, जेन-जी सब देख रही है, यह चेतावनी दी। तत्काल सुधार की मांग की, इसे विचारों का संघर्ष बताया। जीवन के अनुभव साझा कर संघीय सिद्धांतों की हकीकत से संविधान के वादे में अंतर उजागर किया।
द्रविड़ नेता सीएन अन्नादुरई को याद किया, जिन्होंने 1969 में उन्हें वैचारिक वारिस माना। गांधी, पेरियार और अन्ना को प्रेरणा स्रोत बताते हुए गुस्से रहित तर्क का संकल्प लिया। भावुक होकर कहा कि स्मृतियों का बोझ कांपने को मजबूर कर रहा है।
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और सहयोगी दलों को धन्यवाद देते हुए तमिल में समापन किया। यह उनके जीवन का गौरवशाली पल है।