
हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह के दूसरे दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह भव्यता से संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने 1160 विद्यार्थियों को डिग्री व गोल्ड मेडल प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया। पूरा सभागार तालियों व उत्साह से गूंज उठा।
विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। अभिभावकों के चेहरों पर गर्व की भावना झलक रही थी। यह समारोह शिक्षा और संस्कृति के संगम का प्रतीक बना।
मीडिया से बातचीत में स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सनातन परंपरा को एक विशाल आंदोलन करार दिया। गायत्री परिवार ने सदैव समानता का अलख जगाया है—पुरुष-महिलाएं बराबर, सभी जातियां समान, हर व्यक्ति ईश्वर संतान।
उन्होंने कहा, भारतीय संस्कृति की विशेषता यही है कि हम सब एक हैं। एक ही ब्रह्म सबमें व्याप्त है। यही विचार भारत को विश्व से श्रेष्ठ बनाता है। गायत्री परिवार का सृजनात्मक अभियान निरंतर चल रहा है।
पवित्र स्थलों पर विवादास्पद प्रवेश को लेकर उन्होंने पवित्रता व अनुशासन पर जोर दिया। तीर्थ आस्था व परंपरा के केंद्र हैं, वहां मर्यादा अक्षुण्ण रखनी होगी।
यह आयोजन भावी पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का संकल्प दिलाता है।