
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के पूर्व चेयरमैन मनोज गौर सहित तीन लोगों को फ्लैट खरीदारों के धन हड़पने के मामले में नियमित जमानत प्रदान की है। यह फैसला सीबीआई की चार्जशीट के बाद आया, जिसमें घर समय पर न देने के आरोप थे। समीर गौर और सुनील शर्मा को भी यह राहत मिली।
नोएडा की जेपी विश टाउन व जेपी ग्रीन्स जैसी परियोजनाओं में हजारों खरीदारों ने करीब 14,599 करोड़ रुपये दिए, लेकिन निर्माण रुका रहा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया कि यह राशि जेपी सेवा संस्थान, जेपी हेल्थकेयर व जेपी स्पोर्ट्स जैसी इकाइयों में डायवर्ट कर दी गई।
खरीदारों की शिकायतों पर दिल्ली-यूपी पुलिस की ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज किए, जिससे ईडी सक्रिय हुई। नवंबर में मनोज गौर की गिरफ्तारी हुई और जनवरी में 400 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। हालांकि, ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस में वे जेल में ही रहेंगे।
यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र की गहरी समस्याओं को उजागर करता है, जहां प्रमोटरों की महत्वाकांक्षाएं खरीदारों के सपनों पर भारी पड़ती हैं। जमानत से आरोपी को राहत मिली, लेकिन पीड़ितों को इंसाफ की प्रतीक्षा बनी हुई है। परियोजनाओं का पूरा होना या रिफंड ही असली समाधान होगा।