
जोधपुर। प्रसिद्ध कथावाचिका साध्वी प्रेम बाईसा की असामयिक मृत्यु के पीछे दिल का दौरा और गंभीर फेफड़ों की समस्या मुख्य कारण रही। जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश ने शनिवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।
मेडिकल बोर्ड की विस्तृत रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से हृदय-फुफ्फुसीय अस्थिरता (कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट) को मौत का कारण बताया गया, जो अस्थमा या सीओपीडी जैसी पुरानी फेफड़ों की बीमारियों से उत्पन्न हुई।
कमिश्नर ने बताया कि वैज्ञानिक जांच में उनके शरीर में जहर, यौन शोषण या कोई चोट के निशान नहीं मिले। 12 फरवरी को मिली एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्टों ने इसे पुष्ट किया।
घटना 28 जनवरी को आरती नगर आश्रम में घटी। साध्वी को जुकाम व सांस फूलने की शिकायत हुई। कंपाउंडर देवी सिंह ने दो इंजेक्शन दिए, जो मेडिकल प्रोटोकॉल के विरुद्ध थे। कुछ ही देर में उनकी हालत नाजुक हो गई।
परिजनों ने उन्हें प्रेक्षा अस्पताल ले जाया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पिता वीरम नाथ शव आश्रम ले आए, लेकिन पुलिस ने इसे एमजीएच शव गृह भेजा। 29 जनवरी को पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा गया और 30 जनवरी को बाड़मेर के पारियू गांव में अंतिम संस्कार हुआ।
विशेष जांच दल ने साक्ष्य संग्रह किया। दवाओं के प्रभाव पर नई राय ली जा रही है। अंतिम रिपोर्ट के बाद कंपाउंडर के खिलाफ आईपीसी व राजस्थान मेडिकल एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
यह खुलासा भक्तों को राहत देता है तथा आश्रमों में चिकित्सा लापरवाही रोकने की आवश्यकता पर बल देता है।