
प्रसिद्ध राजनीतिक हस्ती हाजी अरफात शेख ने जवाहarlाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। एक सार्वजनिक सभा में उन्होंने जोरदार अंदाज में कहा, ‘क्या ये छात्र जेएनयू पढ़ने जाते हैं या आतंकवाद का प्रचार करने?’ यह बयान सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट तक गूंज रहा है।
शेख ने जेएनयू की पुरानी विवादास्पद घटनाओं का हवाला दिया, जैसे 2016 का कुख्यात नारा कांड और विभिन्न विरोध प्रदर्शन जो राष्ट्र-विरोधी माने जाते हैं। ‘यह प्रतिष्ठित संस्थान करदाताओं के पैसे से चला रहा है, लेकिन रेडिकल विचारों का अड्डा बन गया है,’ उन्होंने आरोप लगाया। सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
शेख के समर्थक इसे साहसिक सत्य के रूप में देख रहे हैं। दक्षिणपंथी समूहों ने इसे जेएनयू की वामपंथी संस्कृति पर प्रहार बताया। वहीं, जेएनयू छात्र संघ ने बयान को बौद्धिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। बाएं विचारों वाले कार्यकर्ताओं ने इसे सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।
यह विवाद आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकता है। जेएनयू प्रशासन की चुप्पी क्या संकेत देती है? राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह परिसर राजनीति पर राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ सकता है। शेख अपने स्टैंड पर अडिग हैं, और आने वाले दिन और गरमाएंगे।