
जम्मू-कश्मीर में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के दम पर आर्थिक आजादी की नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। करीब 1,500 महिलाएं गोबर के उपले, देवी-देवताओं के वस्त्र, हैंडबैग और हस्तशिल्प जैसे कार्यों से जुड़कर नियमित कमाई कर रही हैं। ये प्रयास न केवल उनकी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि पूरे समुदाय को मजबूत बना रहे हैं।
सांबा जिले की ‘सांबा सखी’ पहल कालिका पेंटिंग को नई जिंदगी दे रही है। उद्यमी मीनाक्षी गुप्ता के नेतृत्व में युवतियां इस पारंपरिक कला को व्यवसाय बना रही हैं। राज्य पुरस्कार और पारिवारिक सहयोग ने इस मुहिम को बल दिया है।
‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का रास्ता दिखाया। ग्राहक इन हस्तशिल्पों की तारीफ करते हैं, जो संस्कृति को संजोए रखते हुए महिलाओं को सशक्त बनाते हैं।
ये महिलाएं गर्व से कहती हैं कि उनकी कला जम्मू-कश्मीर की धरोहर है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो रही है। अधिक महिलाओं को जोड़कर वे स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करना चाहती हैं।