
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सोमवार को विधानसभा में खुलासा किया कि पिछले दो वर्षों में जेकेएसएसबी और जेकेपीएससी के माध्यम से आवेदन शुल्क के रूप में 48 करोड़ 88 लाख रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई है। यह जानकारी पुलवामा विधायक वहीद-उर-रहमान पारा के सवाल पर दी गई।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14.48 करोड़ रुपये जमा हुए, जिसमें जेकेपीएससी का योगदान 7.39 करोड़ और जेकेएसएसबी का 7.09 करोड़ रहा। 2024-25 में जेकेपीएससी ने 10 करोड़ से ज्यादा और जेकेएसएसबी ने 23 करोड़ से अधिक रुपये वसूले।
इसी काल में जेकेएसएसबी ने करीब 10,400 पदों के लिए और जेकेपीएससी ने 1,750 पदों पर भर्ती अधिसूचनाएं जारी कीं। ये आंकड़े संघ राज्य क्षेत्र में नौकरियों की भारी मांग को दर्शाते हैं।
विधायक पारा ने पहले 2026-27 के बजट की आलोचना की थी, जिसमें युवाओं और दैनिक मजदूरों के लिए कोई ठोस कदम नहीं हैं। केंद्र शासित प्रदेश में पांच लाख से अधिक शिक्षित बेरोजगार युवा नौकरी तलाश रहे हैं।
उद्योगों की कमी से सरकारी नौकरियां प्राथमिक विकल्प बनी हैं। पहले योग्यता ही काफी थी, अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार अनिवार्य हैं।
मजेदार बात कि एमबीबीएस और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स अब बेरोजगारी के शिकार हैं—15 हजार से ज्यादा डॉक्टर और तीन गुना इंजीनियर बिना नौकरी के।
ये शुल्क सरकार को मिले तो युवा सशक्तिकरण पर खर्च हों, ताकि बेरोजगारी की जड़ें कमजोर हों और जम्मू-कश्मीर उन्नति की राह पकड़े।