
जम्मू-कश्मीर इस जनवरी में असामान्य रूप से शुष्क मौसम का सामना कर रहा है। सामान्य से 96 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे जल संकट और कृषि हानि की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
घाटी में रात के तापमान शून्य से 5 डिग्री नीचे चले गए हैं, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में यह और भी कम है। साफ आसमान तो है, लेकिन बर्फीली हवाओं ने ठंड को असहनीय बना दिया है।
वर्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ला नीना प्रभाव और पश्चिमी विक्षोभों की अनुपस्थिति इसके लिए जिम्मेदार है। ‘सर्दियों में नमी लाने वाले बादल इस बार नहीं आए,’ श्रीनगर मौसम केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. मुख्तार अहमद ने बताया।
कश्मीर घाटी के किसान चिंतित हैं। सेब के बागवान गुलाम नबी कहते हैं, ‘बिना बर्फ या बारिश के खेत सूख जाएंगे, वसंत में नुकसान होगा।’
डैचिगाम और सिंध जैसे जलाशयों का जलस्तर घटा है, जिससे बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने जल संरक्षण की अपील की है।
मौसम विभाग ने शेष महीने में भी शुष्कता बरकरार रहने का अनुमान लगाया है। हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों की अनिश्चितता बढ़ रही है, जिसके लिए जलवायु अनुकूलन उपाय जरूरी हैं।